Kashaq
Thursday, November 19, 2009
ग़म
तो क्या ग़म है,
की हमारी आँखें नम हैं,
यह तो खुशी के आंसू हैं,
जो आपकी आंखों में कम हैं॥
रचनाकार - 'आनंद मिश्रा' ।
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