जाने उस शक्श को कैसा ये हुनर आता है,
रात होती है तो आँखों में उतर आता है,
मैं उस के ख्याल से बचकर कहाँ जाऊं,
वो मेरी सोच कि हर राह पर नज़र आता है॥
आँखों में बनती ख्याल-ए-तस्वीर उसकी,
कभी फूल तो कभी संगीत-ए-ग़ज़ल आता है,
डूबे तो हर गहराई से निकल आयेंगे आशात्,
तेरी आँखों में अथाह समंदर नज़र आता है॥
रचनाकार - अज्ञात एंव 'आनंद मिश्रा' ।