Tuesday, March 23, 2010

पुनः इश्क का नया दांव मत दो

मुझे उमीदों के घाव मत दो,
जुल्फों कि घनी छाँव मत दो,
दर्द का प्याला भरा है अभी,
स्नेह कि मीठी अलाव मत दो।

दूर अभी तुमसे कहाँ हुआ हूँ,
रिश्तों को अभी से पड़ाव मत दो,
रंजिशें, साजिशें बहुत देखी,
किलकारी शब्दों का हिसाव मत दो।

दर्द दो, हया दो, तम दो त्याग दो,
खरी खोटी और जली बद्दुआ दो,
पलकों कि नशीली झुकाव मत दो,
पुनः इश्क का नया दांव मत दो॥

रचनाकार - 'आनंद मिश्र' ॥

Friday, March 5, 2010

एक खुबसूरत ख्वाब में तर जाऊ...

एक खुबसूरत ख्वाब में तर जाऊ,
है तमन्ना ऐसी कि उनकी आँखों में उतर जाऊ,

अनचाहा शोर है गूंजता एक तरफ,
और उनकी धडकनों कि ताल एक तरफ,
एक मधुर अन्तरंग मैं बन जाऊ,
है तमन्ना ऐसी कि उनकी धडकनों में बिखर जाऊ॥

एक खुबसूरत ख्वाब में तर जाऊ,
है तमन्ना ऐसी कि उनकी आँखों में उतर जाऊ

खटक रहा कांटा मन में दुनिया का,
वक़्त के बे-वक़्त नज़ारें छोड़,
एक बे-वाक् आवारगी में बदल जाऊ,
है तमन्ना ऐसी कि उनकी सांसों में पिघल जाऊ

एक खुबसूरत ख्वाब में तर जाऊ,
है तमन्ना ऐसी कि उनकी आँखों में उतर जाऊ


रचनाकार - 'आनंद मिश्र' ।

Tuesday, March 2, 2010

कुछ अँधेरा क्यूँ है...

दर्द-ए-तन्हाई का और आलम क्या बताएं,
मुद्दतें हो गई हैं, हमें मुस्कुराये,
मेरी ख़ामोशी को भी आजकल शिकायत है मुझसे,
राज़ उनसे कहें, या तनहा छोड़ जायें॥

कुछ तम सा था कभी तेरे आने से मन में,
सबकुछ ख़तम सा है तेरे जाने के बाद,
दो-पहर कि धूप भी अब, अँधेरा दूर नहीं करती,
तेरी यादों के छाए से दूर जायें तो कैसे जायें॥

रचनाकार - 'आनंद मिश्र' ।