हँसना आसान था उस रोज़ मगर,
रोने का ही मौसम था|
कुछ आंसू सुख गए थे,
कुछ आंसू से आँख नम था||
तुम्हे देखा यूँ अकेले जाते,
ख्वाब था या, ये वहम था|
दूर होती जिंदगी मुझ-से,
यद्दपि, बीच फासला कम था||
तब की बात और थी जब,
प्यार का रास्ता दुर्गम था|
तुम तो तब से साथ नहीं थी,
जब प्यार ही प्यार का मौसम था||
जाने सुबह से ही क्यूँ,
हवा भी सुस्त-माध्यम था|
कुछ मेरी खुशियों जैसा,
कुछ रिश्ते सा बे-दम था||
हँसना आसान था उस रोज़ मगर,
रोने का ही मौसम था||
आनंद मिश्र
