Monday, August 17, 2009

बरसात

आहा बरसात आ गई...
आहा बरसात आ गई...

एक बूँद फ़िर बारिश की,
तपती भू की तृष्णा बढ़ा गई,
दूर बिजली चमकी आकाश में,
वो देखो बरसात आ गई...
आहा बरसात आ गई...

खुशी के आगमन के पहले ही,
खुशियों की तैयारी छा गई,
एक और बूँद ठंडी सी,
धरती के दिल में समा गई...
आहा बरसात आ गई...

कुछ कच्चे आँगन के फलो को,
देखो कितना इंतज़ार करा गई,
पीपल के पत्तो से टपकी बूँद,
मिटटी की खुशबू बढ़ा गई...
आहा बरसात आ गई...
आहा बरसात आ गई...


रचनाकार - 'आनंद मिश्रा'

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