Tuesday, September 29, 2009

मजबूरियां

....कुछ मजबूरियों का आलम देखो,
उन्हें देख कर भी मुस्करा न सके....
....और तो और अपनी दास्ताँ-ऐ-दिल,
मचले खूब, पर लवो पर छा न सके....

रचनाकार - 'आनंद मिश्रा' ।

Thursday, September 24, 2009

इनाम

ऐ रौशनी-ऐ-तवअब् तेरा नाम कौन ले,
दानिस्ता अपनी जात् पर, इल्जाम कौन ले,
अहल-ऐ-हुनर की जान पर बन आए भी तो क्या,
अता में मिले अगर तो, इनाम कौन ले॥

रचनाकार - 'कैसर'

Monday, September 21, 2009

कहीं प्यार तो कहीं पत्थर मिलता है...

हमने भी इश्क के दायरे में शामिल होकर देखा,
इस दौर में एक सदमा अक्सर मिलता है,
मिलती नही वो, न उनका प्यार मिलता है, यहाँ,
कहीं प्यार तो कहीं पत्थर मिलता है॥

छिपती छिपाती नजरो से भी बचकर उनके,
रस्ते पर एक दीवाना अक्सर मिलता है,
मिलती नही नज़रें, न रद-ऐ-अमल कभी, यहाँ,
कहीं प्यार तो कहीं पत्थर मिलता है॥

सुर्ख आंखों से मुनाकिस लालिमा पलकों में दबाये,
जोहती भी नही मेरे दर्द-ऐ-तवास्सु़त अब तो,
इश्क-ऐ-दौर में ये सदमा अक्सर मिलता है,
कहाँ प्यार, यहाँ तो बस पत्थर मिलता है॥

रचनाकार - 'आनंद मिश्रा' ।

Thursday, September 10, 2009

आजा रे.

अश्कों के बादल झूम के पुकारे,
आजा रे, आजा रे, अब तो आजा रे.....

बिन तेरे लागे नाही रैना,
रंग नाही बिखरे, मन में ना चैना,
दूर ही से तू पर, झलक दिखा जा रे,
आजा रे, आजा रे, अब तो आजा रे.....

परदेसी बालमवा तोरी नख तर जाऊ,
तेरी बलिहारी गीत-संगीत सुनाऊ,
चंद धडकनों की लाज बचा जा रे,
आजा रे, आजा रे, अब तो आजा रे.....

बांवरी भई तोरी राह जहोते,
पूछत हारी, तोरी ख़बर ना मोहते,
म्हारी लास में साँस जगा जा रे,
आजा रे, आजा रे, परदेसी घर आजा रे...

रचनाकार - 'आनंद मिश्रा' ।