Kashaq
Thursday, September 24, 2009
इनाम
ऐ रौशनी-ऐ-तवअब् तेरा नाम कौन ले,
दानिस्ता अपनी जात् पर, इल्जाम कौन ले,
अहल-ऐ-हुनर की जान पर बन आए भी तो क्या,
अता में मिले अगर तो, इनाम कौन ले॥
रचनाकार - 'कैसर'
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