Wednesday, March 11, 2009

मैंने कब रोका है...

मैंने कब रोका है तूफानों को चलने से,
मैंने कब रोका है अरमानो को पिघलने से,
मैं तो कहता हूँ लगा दो आग जितनी दिल में हो,
मैं तो कहता हूँ दिखा दो प्यार जितनी दिल में हो॥

देखना वक्त ख़ुद-ब्-ख़ुद तुम्हारा गुलाम हो जाएगा,
एक कसक सी जागेगी दिल में और दिल मचल जाएगा,
आरजू तो तुम्हारी भी यही है इजहार-ऐ-काफिर,
फरमा के देखो, दिल तो दिल है, पत्थर भी पिघल जाएगा॥

कौन रोका है मुझे आसमा पर चढ़ने से,
पर तुम भी नही आई, तन्हाई में बुलाने से,
तमन्ना थी की आखरी साँस में तुम्हारा आगाज़ हो,
अब कफ़न भी तनहा रहता है तेरे चले जाने से॥

- रचनाकार -- 'आनंद मिश्रा'

No comments: