Saturday, October 3, 2009

बात फूलों की...

फिर छिडी रात, बात फूलों की,
रात है या बरात फुलों की॥

फूल के हार, फूल के गजरे,
शाम फुलों की, रात फुलों की॥

आपका साथ - साथ फुलों का,
आपकी बात फुलों की॥

फूल खिलते रहंगे दुनिया में,
रोज़ निकलेगी बात फुलों की॥

नज़रें मिलती हैं, जाम मिलते हैं,
मिल रही है हयात फुलों की॥

यह महकती हुई ग़ज़ल मकदु,
जैसे सेहरा में रात फुलों की॥

फ़िल्म: बाज़ार
गीत: लता मंगेशकर एवं तलत अजीज़

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