Monday, October 12, 2009

घायल

माना की खुश हुए तुम,
और चेहरे पर तेरे कोई शिकन नही है,
पर कैसे कह सकते हो दिल में,
जुदाई का कोई चुभन नही है।

तो क्यूँ ना जग को लाख बहने दिखा,
अपने हर गम पर जोरदार ठहाके लगाओ,
छाप छोड़ गई हैं यादें जो दिल में,
उन्हें मिटाओगे कैसे तुम ही बताओ।

कह नही सकते की दिल, तुम्हारा दिल,
सिर्फ़ तुम्हारा ही कायल है,
चोट तो दोनों ही दिलों पर लगी हैं,
दोनों ही तनहा और दोनों ही घायल हैं॥

रचनाकार - 'आनंद मिश्रा'

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