छोटी सी मुलाकात है गुजरने को।
मौसम तो गर्मी का है आज, मगर,
आंखों में बरसात है, गुजरने को।
तुम्हे याद बहुत आऊंगा,
सच कहता हूँ, भूल न पाउँगा।
ये अपनी अपनी दिल की बात है,
वक्त से मजबूर होकर, हालात है गुजरने को।
जाना तो इस कदर न, कि फ़िर लौट कर ना आना,
तुम्हारे बिन ये दिल नही करता, सँवरने को।
कुछ लम्हे बचे हैं, जी लेते हैं हम सोचकर,
आज की रात, आखिरी रात है, गुजरने को।
तेरे लौट के आने तक, तेरे जाने के बाद,
कल की शाम तुझ संग बिताने के बाद,
क्यूँ ऐसा लगता है मुझको अक्सर,
बड़ी लम्बी हर रात है, गुजरने को॥
रचनाकार - आनंद मिश्रा।
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