Wednesday, December 24, 2008

आ शाकी मुझसे मिल....

दर्द मेरा देख शाकी,
आ मेरे करीब आ।
रूह को न रख पीछे,
तन को ना आगे ला॥

मन् मेरा उदास था,
और उदासी ना बढ़ा।
मिलना है तो मुझसे मिल,
मेरी हँसी ना उड़ा॥

मैं भी नही, जो तू नही,
तू भी मेरे बिन पूरी नही।
भावनाओ को खिलने दे,
किसी को बीच में न बुला॥

पिघलते अश्क क्यूँ सुखाता है,
जज्बातों को यूँ ना तरसा।
आ शाकी मुझसे मिल,
आ मेरे करीब आ॥

रचनाकार - आनंद मिश्रा।

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